“जॉन डीयर बैकहो खरीदने |सर्वश्रेष्ठ कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर”

चिपचिपी मिट्टी से मिला आइडिया : मिडवेस्ट की चिपचिपी मिट्टी हल के निचले सिरे में चिपक जाती थी, जिसेबार-बार हटाना पड़ता था। इसमें किसानों का अतिरिक्त समय व श्रम खर्च होता था और बुवाई भी अच्छी नहीं होती थी। 1937 में जॉन डीयर ने एक सॉ-मिल में टूटी सॉ-ब्लेड देखी। इससे जॉन डीयर ने दुनिया का पहला स्मूथ पर नुकीला स्टील का हल बनाया।
2011 में Sonalika Tractor बनाने वाली कम्पनी इंटरनेशनल ट्रेक्टर लि. ने रिमोट से चलने वाले एक ट्रेक्टर का कॉन्सेप्ट तैयार किया था। तब ये बड़ी खबर थी लेकिन यह खबर से आगे नहीं बढ़ पाई और कम्पनी ने ना तो इसका मॉडल डिस्प्ले किया और ना ही यह प्रॉडक्शन के लेवल तक पहुंच पाया। 2016 में अमेरिका की ट्रेक्टर कम्पनी जॉन डियर ने ड्राइवरलैस ट्रेक्टर का फील्ड किया था जो कामयाब रहा।
सि‍क्‍के का दूसरा पहलू यह है कि बि‍ना लोन के तो कि‍सानों का काम ही नहीं चलता, अलबत्ता यह लोन उस श्रेणी के हैं जो एक तरह से खेती की आधारभूत जरूरत जैसे खाद, बीज, ईंधन और पानी पर खर्च कि‍ए जाते हैं. इसमें संस्‍थागत और गैर संस्‍थागत दोनों ही कि‍स्म के लोन शामि‍ल हैं। इसको थोड़े बड़े संदर्भ में देखि‍ए. कृषि मूल्य और लागत आयोग की वर्ष 2017-18 की रबी और खरीफ की फसलों के लिए जारी रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2004-05 में किसानों को 1.25 लाख रुपए का क़र्ज़ दिया गया था, जो 2015-16 में बढ़कर 8.77 लाख करोड़ रुपए हो गया. इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि फसल ऋण (यानी बीजों, उर्वरक, मजदूरी भुगतान, परिवहन समेत खेती के खर्चों के लिए दि‍ए जाने वाले लोन में इस अवधि के दौरान आठ गुना की वृद्धि हुई है. यदि राशि में देखें तो यह 0.76 लाख करोड़ से बढ़कर 6.36 लाख करोड़ रुपए हो जाता है, वहीं दूसरी ओर सावधि ऋण यानी खेती के लिए संसाधनों को मजबूत करने के मकसद से दिया जाने वाला ऋण 0.49 लाख करोड़ से बढ़कर 2.05 लाख करोड़ ही रहा. इसका सीधा और साफ मतलब है कि किसान को अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ही इतना कर्जा लेना पड़ रहा है कि वह खेती को बेहतर करने वाले क़र्ज़ के बारे में नहीं सोच पा रहा है. जब संसाधनों पर कि‍सानों का नियंत्रण नहीं है तो वह अपनी खेती को लाभ की खेती कहां से बनाएं.
सुरंगें खोदने वाली दो उत्कृष्ट मशीनें, जिन्हें ‘रचना’ और ‘प्रेरणा’ नाम दिए गए हैं, पूरी तेज़ी से कोलकाता में हुगली नदी के नीचे खुदाई के काम में जुटी हुई हैं, और यदि सब कुछ ठीक रहा, तो दिसंबर, 2019 में देश में पहली बार किसी नदी के नीचे से मेट्रो ट्रेन गुज़रेगी.
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जॉन डीयर के बाद उनके पुत्र चार्ल्स डीयर ने डीयर एंड कंपनी को प्रोफेशनल बनाया। ब्रांडनेम और लोगो चुना गया। 1869 में चार्ल्स डीयर ने कंपनी का मार्केटिंग सेंटर स्थापित किया और राष्ट्रव्यापी रिटेलर्स नियुक्त किए। इसी साल कंपनी को इलिनोइस स्टेट फेयर में बेस्ट एंड ग्रेटेस्ट डिस्प्ले ऑफ प्लो के लिए सिल्वर मेडल और 10 डॉलर (प्रतीकात्मक) नकद पुरस्कार प्रदान किया गया।
दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेक्टर कम्पनी महिन्द्रा एंड Mahindra ने पूरी तरह भारत में डिजायन एंड डवलप्ड Driverless Tractor से पर्दे हटाये हैं। कम्पनी का दावा है कि यह 2018 में जापान और अमेरिका जैसे मार्केट्स में लॉन्च कर दिया जायेगा।
पूरी दुनिया में जब भी तबले की बात उठती है तो वो बात जाकिर हुसैन के बारे में हुए बिना खत्म नहीं हो सकती। 09 मार्च वो दिन है जब विश्व प्रसिद्ध तबला वादक जाकिर हुसैन का जन्म हुआ था। जाकिर हुसैन साहब के जन्मदिन पर आपको बताते हैं उनसे जुड़े वो किस्से जिनके बारे में कम ही लोग जानते हैं।
बालासिनौर के डायनॉसॉर फॉसिल पार्क में 1982-84 के बीच राजासोरस नर्मडेंसिस नाम के डायनॉसॉर के अवशेष मिले थे जिसके अनुसार यह अनुमान लगाया गया था कि डायनॉसॉर की लंबाई 7 से 9 मीटर और ऊंचाई 2.4 मीटर तक रही होगी। साथ ही लगभग 7 करोड़ साल पहले ये यहां पाये जाते थे। डायनॉसॉर के अवशेषों की खोज भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के सुरेश श्रीवास्तव ने की थी।
5. भारत के गाँवों में हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं का बोलबाला है, इसलिए जॉन डियर के मार्केटिंग चीफ़ ने यह तय किया कि इस विज्ञापन का काम ऐसी विज्ञापन-एजेंसी को दिया जाये जो मौलिक रूप से अंग्रेजी में नहीं बल्कि हिन्दी में एक ज़ोरदार विज्ञापन तैयार कर सके।
हे भगवान् ! मेरे मुँह से तो सिसकारी ही निकल गई, आज से पहले मैंने अनीता दीदी को इतना खूबसूरत नहीं समझा था। वो बिस्तर पर सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में खड़ी थी। दूधिया बदन , सुराहीदार गर्दन, बड़ी बड़ी आँखें, खुले हुए बाल और गोरे गोरे जिस्म पर काली ब्रा जिसमे उनके 36 साइज़ के दो बड़े बड़े उरोज ऐसे लग रहे थे जैसे किसी ने दो सफेद कबूतरों को जबरदस्त कैद कर दिया हो। उनकी चूचियां बाहर निकलने के लिए तड़प रही थीं। चूचियों से नीचे उनका सपाट पेट और उसके थोड़ा सा नीचे गहरी नाभि, ऐसा लग रहा था जैसे कोई गहरा कुँआ हो। उनकी कमर २६ से ज्यादा किसी भी कीमत पर नहीं हो सकती। बिल्कुल ऐसी जैसे दोनों पंजो में समां जाये। कमर के नीचे का भाग देखते ही मेरे तो होंठ और गला सूख गया। उनकी गांड का साइज़ ३६-३७ के लगभग था। बिल्कुल गोल और इतना ख़ूबसूरत कि उन्हें तुंरत जाकर पकड़ लेने का मन हो रहा था। कुल मिलाकर वो पूरी सेक्स की देवी लग रही थीं…..
मैं उठा और हाथ मुँह धोकर खाने के लिए मेज़ पर गया, वहां अनीता दीदी भी बैठी थी। असल में आज खाना अनीता दीदी ने ही बनाया था। मैंने खाना खाना शुरू किया और साथ ही साथ टीवी चला दिया। हम इधर उधर की बातें करने लगे और खाना खा कर टीवी देखने लगे।
साहेब, मैं तो अपने दुनिया में  मस्त था. वो तो सगे  सम्बन्धियों  ने अपने घर  का ऐसा सपना दिखाया कि दोनों भाइयों ने मिलकर उच्च ब्याज दर पर कर्ज थोड़ी सी जमीन खरीदी, जितनी जमीन में आपकी कारकेड तो छोड़िये,  आपकी अकेले की गाड़ी ही पार्क हो सकती है. धीरे-धीरे पेट काटकर कर्ज चुकाकर घर बनाना शुरू किया. ध्यान रहे, इनकम टैक्स भरता हूं तो कुल सालाना आमद-खर्च का कागज़ ऐसा है कि एक संस्था ने घर बनाने के लिए किस्तों में लोन देना शुरू किया है. इतने में  आपने कुर्सी से उठकर फिर बैठकर पूरा कुनबा बदल लिया और सुधार के नाम पर असली संकट अब शुरू हुआ है.
एचएमटी का नमा जेहन में आते ही कई लोग घड़ी के बारे में सोचने लगते हैं। अगर आप भी ऐसा ही सोच रहे हैं तो हां यह सच है कि एचएमटी ही घड़ी भी बनाती थी और ट्रैक्टर भी बनाती है। यह कंपनी 1971 में बेंगलुरू से शुरू हुई थी।
फिलहाल ऐसा ही कुछ जिले के एक 10वीं तक ही पढ़ाई किये युवक ने कर डाला है। उनकी ओर से तैयार मिनी ट्रैक्टर से खेत की जुताई, गन्ने की गुड़ाई तथा अन्य फसलों की निराई-गुड़ाई की जा सकती है। वो भी महज सैकड़े रुपए की खर्च में ही ऐसा हो सकता है और कई दिन का काम घंटों में किया जा सकता है। यह कारनामा लगभग 30 वर्षीय राजितराम वर्मा ने किया है। वह थाना महरुआ के रघुनाथपुर गांव के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि पुरानी सुजकी बाइक, साइकिल और ठेला के पहियों के जरिए तीन फार (फाल) का मिनी टैक्टर तैयार किया है। उस ट्रैक्टर से वह खेत की जुताई और गन्ने की गुड़ाई करते हैं।
(ए.बी.सी.टेक्नॉलोजीज़ के गुड़गाँव स्थित मुख्यालय में निदेशक मंडल की मीटिंग शुरू होनेवाली है। कंपनी ने हाल ही में वर्ष 2009-2010 के तृतीय तिमाही के खाते फ़ाइनल किए हैं। इन्हीं को कंपनी के प्रबंध टेक्नॉलोजीज़ निदेशक श्री राजीव बत्रा अपने निदेशक मंडल के सम्मुख रखने वाले हैं)
परिवार और बढ़ने का मतलब है कि इस कंपनी को स्थापित करने का जो मैंने सपना देखा था उसी तरह से सपने देखनेवाले मुझे मिले और आज पाँच साल हो गए हैं हमें और आपको उस सपने को साकार रूप देते देते। इस दौरान हमने जहाँ बाज़ार को बुलंदियाँ छूते देखा वहीं पिछले दशक का सबसे खराब दौर भी हमारी छोटी सी विकास यात्रा का एक दौर बना। आज हम गर्व से कह सकते हैं कि हमने अच्छे दौर को आनंद से जिया और बुरे दौर को भी बिना किसी कठिनाई के झेला। मेरा मानना है कि अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने का जो हमारा स्पष्ट दृष्टिकोण है वही हमारा सबसे बड़ा मार्गदर्शक है और सारे उतार-चढ़ावों में वही हमें आंतरिक और बाह्य ऊर्जा प्रदान करता है। आप लोगों का और समय न लेते हुए मैं आज की मीटिंग का जो एकमात्र एजेंडा है उस पर आता हूँ और अपने चार्टेड-अकाउंटेंट से निवेदन करता हूँ कि तृतीय तिमाही यानी अक्टूबर 2009 से दिसंबर 2009 के नतीजों की एक ऑडिट प्रति मुझे सौंपे जिससे कि मैं उसकी प्रमुख उपलब्धियों से आपको अवगत करा सकूँ और तत्पश्चात आप सब की सहमति से उन्हें सार्वजनिक किया जा सके।
बाजार की चाल पर बात करते हुए अविनाश गोरक्षकर का कहना है कि ऊपरी स्तर पर रजिस्टेंस देखऩे को मिल सकता है। मौजूदा स्तर से बाजार में उतार- चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कल के सत्र में बाजार में आनेवाले कंपनियां के तिमाही नतीजे बाजार को नई दिशा दे सकते है।
5. बाग-कर्षित्र (Garden tractor) – यह बगीचों या छोटे छोटे खेतों में व्यवहार किया जानेवाला सबसे छोटे आकार का ट्रैक्टर होता है। यह तीन आकार का बनाया जाता है: छोटा आकार, मध्यम आकार और बड़ा आकार। छोटे आकारवाले यंत्र से बगीचों में पौधा लगाने का एवं खेती का कार्य लिया जाता है। मध्यम और बड़े आकारवाले बाग कर्षित्र का व्यवहार हल चलाने आदि के कार्य के लिये लिया जाता है। इस यंत्र को चालक चलाता है ओर उत्तोलक (Lever) की सहायता से इसे नियंत्रित करता है।
भाप इंजन का आविष्कार एवं विकास अंतर्दहन इंजन से एक सौ वर्ष पहले हुआ था। उस समय ट्रैक्टर का व्यवहार केवल गाहने की मशीन (thresher) के चलाने में किया जाता था। भाप ट्रैक्टर में कुछ विकास होने के बाद इसका व्यवहार खेत को तैयार करने, बीज बोने और फसल काटने के लिए किया जाने लगा। कृषि के लिए भाप ट्रैक्टर उपयोगी सिद्ध नहीं हुआ, क्योंकि यह अत्यंत भारी एवं मंदगतिगामी (slow moving) था। इसके अतिरिक्त इसके लिय प्रचुर मात्रा में ईंधन एवं वाष्पित्र जल की अवश्यकता होती थी जिसकी देखभाल के लिए दूसरे आदमी की आवश्यता पड़ती थी।
1982 से 1991 तक, बारह उत्कृष्ठ समय (प्राइमटाइम) गारफील्ड कार्टून स्पेशल्स एवं एक घंटे की दीर्घ अवधि की प्रमुख चरित्र की दसवीं वर्षगांठ मनाते हुए प्राइमटाइम वृत्तचित्र प्रसारित किया गया; जिन सबमें लोरेंज़ो म्युज़िक (Lorenzo Music) के गारफील्ड को आवाज़ दी। एक टेलिविज़न कार्टून शो गारफील्ड एंड फ्रेंड्स को लगातार सात सत्रों के लिए 1988 से 1994 के बीच प्रसारित किया गया; इस अनुकृत रूपांतरण को भी गारफील्ड की आवाज़ के रूप में संगीत से संवारा गया। द गारफील्ड शो (The Garfield Show), जो कि एक सीजीआई (CGI) सिरीज़ थी, अपना निर्माण 2008 से आरंभ किया जो संयोगवश स्ट्रिप्स की 30वीं सालगिरह भी थी।[32] दिसंबर 2008 में इसका प्रीमियर फ़्रांस में हुआ और संयुक्त राज्य में 2 नवम्बर 2008 को कार्टून नेटवर्क पर इसने अपना श्रीगणेश किया।
दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक कत्ल के मामले की जांच में जुटी पुलिस तब हैरान रह गई जब आरोपी ने खुलासा किया कि उसने एक नहीं बल्कि पूरे परिवार के लोगों की हत्या करवा दी है वह भी सुपारी किलर के जरिए. पुलिस ने बुराड़ी इलाके के एक मकान से देर रात पांच फीट खुदाई करके दो शव बरामद भी कर लिए हैं.
जुलाना। राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर-352 के लिए अधिगृहीत की गई जमीन का मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर शनिवार को 29वें दिन किसान लोग धरने पर डटे रहे। सरकार को चेताने के लिए एवं मुआवजा की मांग को लेकर शनिवार को किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रालियों की रैली कस्बे से निकालीं। किसानों ने धरने के बहाने ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से अपनी ताकत दिखाने का प्रयास किया। रैली पुराना बस स्टैंड से शुरू होकर मैन बाजार, पुरानी अनाज मंडी, नई तहसील, नया बस स्टैंड एवं पुरानी तहसील से होकर ट्रैक्टरों एवं ट्रालियों के साथ धरना स्थल तक पहुंचे। किसानों ने कहा कि अगर जल्द ही उनकी मांगों नहीं मानी गई तो वह 15 फरवरी को जींद में होने वाली रैली के दिन जुलाना के सभी रास्तों पर ट्रैक्टर-ट्राली अड़ा कर रास्ते जाम कर देंगे।
डेविस अब गारफील्ड का एकमात्र एकलौता कलाकार नहीं रह गया है। हालांकि वह अब भी कहानियां और हलके-फुल्के रेखाचित्र लिखता है, दूसरे कलाकार स्याही भरने, रंगने और अभिलेखन की देखभाल करते हैं। अन्यथा डेविस अपना अधिकांश समय व्यापर प्रबंधन एवं गारफील्ड के व्यवसायी मामलों में लगाता है।[9]
1. उस सपने को साकार रूप देते देते देते देते is the adverbial form derived from the present participle of the verb देना. When reduplicated, the form would be used without हुए and will always be in the durative sense of ‘while giving continuously’
इस लिस्ट में 5वें स्थान पर अमेरिकन मूल के एक ट्रैक्टर कंपनी जॉन डियरे है । अमरीका की यह कंपनी भारत में अच्दा परफॉर्म कर रही है। इस कंपनी की स्थापना 1837 में हुई थी और ग्लोबल फॉच्र्यून की लिस्ट में 300वें स्थान के आसापास है।
आप देख रहे हैं अमर उजाला टीवी का स्पेशल बुलेटिन यूपी न्यूज़ । हर रोज जब आप अपने काम में व्यस्त होते हैं, कई जरूरी खबरें आपसे छूट जाती हैं। सुबह के ठीक 9  बजे तब अमर उजाला टीवी आपके लिए लाता है दिन की हर बड़ी खबर सिर्फ यूपी न्यूज़ में।
वहीं बसों सहित अन्य वाहनों में स्पीड गर्वनर नहीं लगाए जा रहे है, जिससे वाहनों की रफ्तार पर लगाम नहीं लग पा रही है। छोटे वाहनों से लेकर बड़े वाहन तेज रफ्तार में सड़कों पर दौड़ रहे है, जो सीधे-सीधे हादसों का निमंत्रण दे रहे है। तेज रफ्तार वाहनों के कारण हर जिले में 85 फीसदी हादसे होते है, जिनमें 50 लोगों की मौतें हो रही है, इन्हें रोकने के लिए पुलिस ने सिर्फ एक्सीडेंट पाइंट चिह्नित किए, लेकिन इस पर कोई काम नहीं किया। हर साल अप्रैल में एक्सीडेंट पर होने वाली बैठक में पुलिस योजना बनाकर काम करना भूल जाती है।
औरंगाबाद – शालेय दशेतच विद्यार्थ्यांचा कल ओळखून योग्य मार्गदर्शन आणि समुपदेशन मिळाल्यास त्यांना आवडीनुसार करिअर निवडता येते. ही बाब लक्षात घेत नववीच्या विद्यार्थ्यांप्रमाणेच दहावीच्या विद्यार्थ्यांचीदेखील चाचणी घेण्याचा विचार सुरू असल्याचे शिक्षण आयुक्त डॉ. पुरुषोत्तम भापकर यांनी सांगितले. चाचणीच्या निष्कर्षावर पुढील मार्गदर्शन देण्यात येईल, असेही ते म्हणाले. प्रगत शैक्षणिक महाराष्ट्र कार्यक्रमांतर्गत गुणवत्ता सुधारसाठी डॉ. भापकर यांच्या उपस्थितीत विभागीय माध्यमिक…
विवादित मस्जिद के ठीक नीचे मिले इस इमारत का आकार 50 गुना 30 मीटर उत्तर दक्षिण और पूरब पश्चिम था. इसके 50 खम्भों के आधार मिले हैं. इसके केंद्र बिंदु के ठीक ऊपर विवादित मस्जिद के बीच का गुम्बद है, लेकिन अस्थायी मंदिर में भगवान राम की मूर्तियां रखी होने से उस जगह की खुदाई नहीं हो सकी.
The Ottu barrage was constructed in 1896-97 using low-cost labor that was available due to a famine in the region at that time.[1] Prior to the construction of the barrage and its associated reservoir and canals, agriculture in the then princely state of Bikaner had come under pressure from fluctuating water-supply in the monsoon season caused by diversions in the Ghaggar by riparian farmers further upstream.[4] The barrage and canals cost 6.3 lakh rupees to construct, 2.8 lakhs of which was paid by the princely state of Bikaner and the remainder by the British-run Government of India.[4]
प्राचीन समय के ट्रैक्टरों में मन्दगामी विशाल क्षैतिज इंजन लगाए जाते थे जिनमें केवल एक या दो सिलिंडर होते थे। इस तरह के भारी भरकम इंजनों को संभालने के लिये मजबूत पंजर, बड़े पहिए आदि की आवश्यकता होती थी जिसके फलस्वरूप स्वयं ट्रैक्टर ही बहुत भारी हो जाता था और इसमें कार्य लेने में कठिनाई होती थी। आजकल उच्च गतिवाले हल्के इंजनों का प्रयोग अधिक हो रहा है जिनमें मुख्यत: दो सिलिंडर क्षैतिज इंजन और चार या छ: सिलिंडर वाले ऊर्ध्वाधर इंजन हाते हैं। टैक्टर इंजन के मुख्य पुर्जे, जैसे पिस्टन, क्रैक शाफ्ट (crank shaft) बेयरिंग (bearing), वाल्व (valve) आदि मोटर गाड़ी इंजन के पुर्जो की अपेक्षा अधिक बड़े और भारी होते हैं। सभी सिलिंडर एक ही ढलाई (casting) में बनाए जाते हैं। ट्रैक्टर इंजन के सिलिंडर शीघ्र ही नष्ट होने लगते हैं। इस कठिनाई को सुलझाने के लिये ये दो विधियाँ काम में लाई जाती हैं।
It was once assumed by some historians that Ottu lake was the site where Timur had encamped after overpowering Bhatnair fort in Hanumangarh (Rajasthan) during his invasion of India in 1398-99 CE. However, it is now known that the actual site of his camp, which he described as being Kinar-e-Hauz (i.e. on the banks of a tank or lake), was at the banks of Talwara Lake, which is further 40 km downstream in Hanumangarh district between Ellenabad and Hanumangarh town.[5]
Extreme winter snowfall and snow blizzard has made the conditions worst for the civilians. Your job begins as a snow rescue excavator duty driver to operate heavy duty equipment and excavator cranes. The best snow plow excavator simulator is here to download and enjoy. You might have mastered the truck driving or snow plow excavator driving skills, this is a new task in extreme winter conditions with tractor trolley. Your duty as a snow rescue team is to clear the roads and traffic jam due to excessive snowfall and land sliding. Identify the affected areas and drive your heavy excavator crane to dig and dump snow. Heavy construction machinery like cranes, excavators, trucks, tractors and dumpers are not easy to drive. It’s time to show your skills in driving to manage the Excavator Snow loader Tractor.

One Reply to ““जॉन डीयर बैकहो खरीदने |सर्वश्रेष्ठ कॉम्पैक्ट ट्रैक्टर””

  1. वर्तमान समय में देवकांत सिर्फ धान की दुलर्भ प्रजातियों की ही खेती नहीं करते हैं, बल्कि यह प्रजातियां औषधीय गुणों से भी भरपूर होती हैं। उनमें से सबसे मशहूर है  “चखाओ पोरेटन” नाम का काला चावल। इस काले चावल के औषधीय गुणों से वायरल फीवर, नजला, डेंगू, चिकनगुनिया और कैंसर जैसे रोग तक ठीक हो जाते हैं। देवकांत को उनके इस अनोखे काम के लिए 2012 में पीपीवीएफआरए संरक्षण अवार्ड (प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैराइटीज एंड फारमर्स राइट्स एक्ट) भी मिल चुका है।
    बिछुआ पुलिस के अनुसार रोजाना की तरह शुक्रवार की सुबह डूंडासिवनी निवासी राजा बरकड़े अपने ट्रेक्टर में रेत लेकर जा रहा था कि तभी रास्ते में जैसे ही ट्रेक्टर लेकर राजा डूंडासिवनी के टेक में पहुंचा कि अचानक ही ट्रेक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया। इस हादसे के दौरान टेक में ट्रेक्टर के समीप से गुजर रहे करीब 5 मजदूर चपेट में आ गए। जिस कारण उन्हें चोट आई। आनन फानन में लोगों ने ट्रेक्टर की चपेट में आए मजदूरों को निकाला और नाजुक स्थिति में बिछुआ अस्पताल से नागपुर रेफर कर दिया गया। पुलिस के अनुसार सुखिया बाई, कौशल परतेती सहित अन्य मजदूरों को नागपुर भेजा गया है। इधर पुलिस मामले की तफ्तीश में जुटी हुई है।
      आर्कटिक क्षेत्र, रूस – 16 अगस्त, 2017 – रूस के सबसे बड़े खुले गड्ढे मेरा में, चीन में सबसे बड़ा टन भार के साथ लोडर – XCMG LW1200K और दो चक्र बुलडोजर XCMG DL900A 20,00 से अधिक के लिए काम कर रहा है …
    ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के अलावा यातायात पुलिस हैवी वाहन ट्रक, ट्रोला सहित अन्य लोडिंग वाहनों पर भी कार्रवाई नहीं कर रही है, जो कि न सिर्फ शहर में धड़ल्ले से दौड़ रहे और नियमों की धज्जियां उड़ा रहे है। ओवर लोड इन वाहनों पर भी पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं की जा रही है। जबकि शहर में दिनभर में आधा सैंकड़ा के करीब ट्रक व अन्य लोडिंग वाहन गुजर रहे है, जिन्हें यातायात पुलिस द्वारा नहीं रोका जा रहा है। कराहल और विजयपुर में तो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को ही सवारी वाहन बनाकर रखा हुआ है। लोग इन्हीं से सफर रहे है, इसके अलावा कई स्थानों पर तो ट्रकों से भी सवारी ले जाई जा रही है। जिसे रोकने पुलिस भी बिल्कुल भी आगे नहीं आ रही है।

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